विश्व शांति हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन

दोस्तों आज के इस Post में आप पढ़ेंगे विश्व शांति हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ का गठन (Formation of United Nations Leaque for Peace) पर सरल शब्दों में एक लेख हिंदी में तो चलिए प्रारम्भ करते हैं।

Formation of United Nations Leaque for Peace in hindi text image

संयुक्त राष्ट्र संघ का परिचय :- 

1945 के बाद द्वितीय महायुद्ध की समाप्ति पर विश्व शान्ति हेतु एक संस्था का आयोजन किया गया जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ कहते हैं । राष्ट्र संघ के बाद यह दूसरी शांति संस्था थी । द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका ने संसार के देशों को यह सोचने को मजबूर किया कि कोई ऐसी संस्था हो जो संसार को विनाश से बचा सके ।

24 अक्टूबर 1945 को संयुक्त राष्ट्र की विधिवत स्थापना हुई । प्रारम्भ में केवल 51 राष्ट्र ही इसके सदस्य थे । वर्तमान में इसकी सदस्य संख्या बढ़कर 189 हो गई हैं । इसका कार्यालय न्यूयार्क में हैं । संयुक्त राष्ट्र के विधान को चार्टर कहते हैं ।

संयुक्त राष्ट्र संघ के उद्देश्य :-

( 1 ) अन्तर्राष्ट्रीय शांति तथा सुरक्षा कायम रखना ।
( 2 ) सभी राष्ट्रों के बीच समान अधिकार और आत्मनिर्णय के सिद्धान्तों के आधार पर मैत्रीपूर्ण संबंधों का विकास करना ।
( 3 ) शान्तिपूर्ण उपायों से अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाना ।
( 4 ) विश्व की आर्थिक सामाजिक और सांस्कृतिक आदि मानवीय समस्याओं के समाधान हेतु अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग प्राप्त करना ।
( 5 ) जाति , भाषा , लिंग एवं धर्म का भेद किए बिना , सबके लिये मानव अधिकारों और मौलिक स्वतंत्रताओं के सम्मान को बढ़ावा और प्रोत्साहन देना ।
( 6 ) इन सामान्य उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए विश्व के राज्यों के बीच सहयोग और समानता स्थापित करना ।

सिद्धान्त :-

( 1 ) सभी सदस्य राष्ट्र समान हैं ।
( 2 ) सभी सदस्य राष्ट्र चार्टर के अनुसार अपने कर्तव्यों का पालन करने के लिए वचनबद्ध हैं ।
( 3 ) सभी सदस्य राष्ट्र अपने झगड़ों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझायेगे ।
( 4 ) प्रत्येक सदस्य राष्ट्र एक दूसरे की स्वतंत्रता और प्रादेशिक अखंडता को बनाए रखेगा ।
( 5 ) कोई भी सदस्य राष्ट्र चार्टर के प्रतिकूल कार्य करने वाले देश की सहायता नहीं करेगा ।
( 6 ) संयुक्त राष्ट्र किसी भी सदस्य राष्ट्र के आंतरिक मामले में हस्तक्षेप नहीं करेगा ।
( 7 ) संयुक्त राष्ट्र का यह प्रयास रहेगाा कि सदस्य राष्ट्र इसके सिद्धांतानुसार आचरण करें ।

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संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख अंग :-

( 1 ) महासभा या साधारण सभा
( 2 ) सुरक्षा परिषद
( 3 ) आर्थिक व सामाजिक परिषद
( 4 ) संरक्षण या न्याय परिषद
( 5 ) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय
( 6 ) सचिवालय

1. साधारण सभा या महासभा ( General Assembly ) : -

साधारण सभा संयुक्त राष्ट्र की सबसे से बड़ी संस्था हैं । संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य इसके सदस्य हैं । हर राष्ट्र को एक वोट देने का अधिकार हैं । हर राष्ट्र 5 ( पाँच ) प्रतिनिधि भेज सकता हैं । साधारण सभा की बैठक साल में एक बार अवश्य होती है पर आवश्यकता पड़ने पर इसकी विशेष बैठक भी बुलाई जा सकती है । इसकी बैठकों में महत्वपूर्ण विषयों पर दो तिहाई बहुमत तथा साधारण बातों साधारण बहुमत से निर्णय होता हैं । इसका अपना अध्यक्ष होता है । प्रत्येक अधिवेशन के लिए नए सभापति का चुनाव होता है ।

2. सुरक्षा परिषद ( Security Council ) : - 

इसके पाँच स्थायी और दस अस्थायी सदस्य होते हैं । फ्रांस , रूस ब्रिटेन संयुक्त राज्य अमेरिका तथा चीन इस परिषद के स्थायी सदस्य हैं । सुरक्षा परिषद सयुक्त राष्ट्र की कार्यकारिणी है । प्रत्येक सदस्य को एक वोट देने का अधिकार है । स्थायी सदस्यों को ' वीटो या विशेषाधिकार प्राप्त है । इसका तात्पर्य यह है कि अगर पाँच स्थायी सदस्यों में से कोई भी सदस्य प्रस्ताव का विरोध करे तो यह प्रस्ताव स्वीकृत नहीं होगा ।

3. आर्थिक और सामाजिक परिषद ( Economic & Social Counsil ) : - 

आर्थिक और सामाजिक परिषद का उद्देश्य ससार को अधिक समृद्धिशाली , सुखी और न्यायपरायण बनाना है । इस परिषद में साधारण सभा द्वारा दो - तिहाई बहुमत से चुने गए सदस्य होते हैं । सदस्यों का चुनाव तीन वर्ष के लिए किया जाता है । प्रत्येक वर्ष एक - तिहाई सदस्य पदमुक्त हो जाते हैं । उनकी जगह नये सदस्यों का चुनाव होता है । यह परिषद अन्तर्राष्ट्रीय अर्थ , समाज , शिक्षा , संस्कृति , स्वास्थ्य पर विचार करती है ।

4. संरक्षण परिषद ( Trusteeship Council ) : - 

संरक्षण परिषद का मुख्य कार्य इन देशों की आर्थिक , सामाजिक , राजनीतिक और शैक्षणिक उन्नति करना तथा उन्हें स्वशासन की शिक्षा देना है । न्याय परिषद उन परतंत्र उपनिवेशों एवं प्रदेशों की देखभाल करती है , जो संयुक्त राष्ट्र के संरक्षण में है ।

5. अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय ( Security Council ) : -

अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय संयुक्त राष्ट्र का न्यायिक अंग है । इसका मुख्यालय हेग नीदर लैण्ड के नगर में हैं । अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय में 15 न्यायाधीश होते हैं । इन न्यायाधीशों का चुनाव सुरक्षा परिषद और महासभा में होता है। इसका कार्यकाल 9 वर्ष का होता है । इसमें नियमों के तहत विवादों को सुलझाया जाता है ।

6. सचिवालय ( Secretariat ) :-

 सचिवालय का सर्वोच्च पदाधिकारी महासचिव ( Secretary Gerneral ) कहलाता है । उसी के देखरेख में सचिवालय का कार्य होता है । सचिवालय के कर्मचारियों की संख्या 8000 है । सचिवालय अमेरिका के न्यूयार्क शहर में स्थित है । संयुक्त राष्ट्र के वर्तमान महासचिव कोफी अन्नान है।

संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत की भूमिका :-

1. संघ की स्थापना और चार्टर निर्माण में : -

सेनफ्रान्सिसकों सम्मेलन में भाग लेकर भारत 51 संस्थापक देशों में से एक सदस्य बना । मानव अधिकार और मौलिक स्वतंत्रताओं को भारतीय प्रतिनिधियों की सिफारिश पर चार्टर में जोड़ा गया ।

( 2 ) संघ की सदस्य संख्या बढ़ाने में : -

संघ में अपने विरोधी गुट को प्रवेश देने में कई देश रूकावट डालते थे परन्तु भारत ने आक्रमणकारी चीन के प्रवेश का समर्थन कर सदस्य संख्या बढ़ाने में प्रेरक कार्य किया ।

( 3 ) संघ के विभिन्न अंगों के संचालन में : -

सन 1954 में भारत की श्रीमती विजय लक्ष्मी पंडित संयुक्त राष्ट्र महासभा के आठवे अधिवेशन में अध्यक्षा निर्वाचित हुई । डॉ . राधाकृष्णन और मौलाना अब्दुल कलाम आजाद यूनेस्को के प्रधान निर्वाचित हुए । श्रीमती राजकुमारी अमृत कौर विश्व स्वास्थ्य संगठन , डॉ . बी.आर. सेन विश्व खाद्य एवं कृषि संगठन , बाबू जगजीवन राम , अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन , डॉ . एच.जे. भामा अणुशक्ति आयोग के अध्यक्ष , डॉ . चिन्तामणी देशमुख अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के अध्यक्ष , डॉ . नगेन्द्र सिंह अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश रहकर संघ के संचालन में सहयोग करते रहे ।

( 4 ) संध के शांति व सुरक्षा संबंधी कार्यों में :-

  • कोरिया समस्या : - उत्तर और दक्षिण कोरिया के युद्ध में विश्वयुद्ध की संभावनाएँ बढ़ रही थी । संयुक्त राष्ट्र ने वहाँ शांति स्थापित करने 16 राष्ट्रों की सेनाएँ भेजी । उसमें भारतीय सैनिक भी थे जिन्होंने युद्ध बंदियों की अदला बदली में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई । समस्या : -1956 प्रतिक्रियावादी तत्वों ने हंगरी में विद्रोह कर दिया । हंगरी सरकार के अनुरोध पर रूस ने
  • हंगरी समस्या :- 1956 में प्रतिक्रियावादी तत्वों ने हंगरी में विद्रोह कर दिया।  हंगरी सरकार के अनुरोध पर रूस ने सेना भेज कर विद्रोह को दबा दिया । संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत ने हंगरी में शांति स्थापना के प्रयासों का समर्थन किया ।
  • स्वेजनहर समस्या :- 26 जुलाई 1956 को मिस्र ने स्वेजनहर का राष्ट्रीयकरण कर दिया । स्वेजनहर पर अपना अधिकार स्थापित करने इंग्लैण्ड , फ्रांस और इजराइल ने मिस्र पर आक्रमण कर दिया । भारत ने इन आक्रमणकारी देशों की निंदा कर युद्ध बंद कराने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की ।
  • कांगो समस्या : - कांगों के स्वतंत्र होने पर बेल्जियम ने उस पर हस्तक्षेप करना शुरू कर दिया । संयुक्त राष्ट्र संघ के आदेश से भारत ने अपनी सेना की बड़ी टुकड़ी भेजकर कांगों में युद्ध के खतरे को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।
  • निःशस्त्रीकरण हेतु किये गये प्रयास :-  भारत ने सहयोगी देशों की मदद से सन 1961 में महासभा में आणविक परीक्षणों को बन्द करने का प्रस्ताव रखा । 1963 में ब्रिटेन , अमेरिका और रूस के आणविक परीक्षण प्रतिबंध संधि का भारत ने स्वागत किया । सन 1987 में राजीव गाँधी ने महासभा में निःशस्त्रीकरण की पुनः अपील की ओर 1988 में 22 वर्षों में चरणबद्ध कार्यक्रम के तहत पूर्ण निःशस्त्रीकरण का सुझाव दिया ।
  • रंगभेद के विरूद्ध संघर्ष : -  दक्षिण अफ्रीका और रोडेशिया की गोरी सरकारों द्वारा अश्वेतों पर किये जाने वाले अत्याचारों का भारत ने प्रबल विरोध किया । संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत के लगातार दबाव बनाये रखने से 22 दिसंबर 1993 में अफ्रीका में अश्वेतों को भी बराबरी का अधिकार मिल गया ।
  • उपनिवेशवाद समाप्ति हेतु किये गये प्रयास : -  भारत ने उपनिवेशवाद की समाप्ति और यहाँ की जनता की स्वतंत्रता के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ में जो प्रस्ताव रखा उसे स्वीकार कर लिया गया । बंगलादेश और नामीबिया को मुक्त कराने में भारत ने महत्वपूर्ण योगदान दिया ।
  • मानव अधिकारों की रक्षा में :- भारत मानव अधिकारों का सदैव समर्थक रहा । 21 दिसंबर 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने " मानवधिकार ' उच्चायोग का गठन किया । भारत ने उच्चायोग के सुझावों को मान्यता दी । यह संयुक्त राष्ट्र महासचिव और महासभा के अधीन काम करते हुए नागरिक , सामाजिक , सांस्कृतिक और अन्य सभी प्रकार के मानवअधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने के लिए उत्तरदायी है।
  • आर्थिक सामाजिक समस्याओं को हल करने में : - भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ के माध्यम से आर्थिक दृष्टि से पिछड़े देशों पर विशेष बल दिया । विकसित देशों से अविकसित देशों के लिए अधिकाधिक आर्थिक सहायता देने की अपील की । 24 अक्टूबर 1985 में राजीव गांधी ने महासभा के सदस्य देशों से अपील की कि विश्व शांति के प्रति स्वयं को समर्पित। करते हुए विश्व से भुखमरी को दूर करने के। लिए संघर्ष करें।

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